8वें वेतन आयोग पर DOPT की बैठक: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिये 5 बड़ी सिफारिश

नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग को लेकर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक में हर 5 साल में पेंशन बढ़ोतरी, कंप्यूटेशन की अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करना, और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को ₹1000 से ₹3000 करने जैसी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा समेत अन्य कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कर्मचारियों व पेंशनभोगियों की प्रमुख समस्याओं को सरकार के सामने रखा।


DOPT की बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

1. हर 5 साल में पेंशन बढ़ोतरी

बैठक में सबसे अहम मुद्दा हर 5 साल में पेंशन बढ़ाने का था। अभी पेंशन में बढोतरी 80 साल पूरी होने पे की जाती है। इसके अलावा वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर होता है, जो आमतौर पर 10 साल बाद लागू होता है। लेकिन अब 65 साल से 5% पेंशन वृद्धि की मांग की जा रही है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, तो हर 5 साल में पेंशनभोगियों की पेंशन स्वतः बढ़ जाएगी

सरकार One Rank One Pension (OROP) की तर्ज पर इस प्रस्ताव को लागू करने पर विचार कर रही है, जिससे रक्षा पेंशनर्स के साथ-साथ सभी सरकारी पेंशनर्स को भी फायदा मिलेगा।

2. कंप्यूटेशन की अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करना

अभी सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की पेंशन का एक हिस्सा 15 साल तक कटौती के रूप में लिया जाता है, जिसे कंप्यूटेशन कहते हैं। कर्मचारी संगठनों ने इस अवधि को 12 साल करने की मांग की है ताकि पेंशनर्स को जल्द से जल्द पूरी पेंशन मिल सके।

3. फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को ₹1000 से ₹3000 करना

वर्तमान में रिटायर्ड कर्मचारियों को ₹1000 मासिक फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) मिलता है, लेकिन मौजूदा महंगाई को देखते हुए इसे ₹3000 करने की मांग रखी गई। दवाइयों और इलाज के बढ़ते खर्च को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी संघों ने इस मांग को जायज ठहराया।

4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली पर जोर

बैठक में गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का मुद्दा भी उठाया गया। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि नई पेंशन योजना (NPS) से कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है और उन्हें पुरानी पेंशन योजना के तहत ही पेंशन दी जानी चाहिए।

5. रेलवे और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों की मांगें

DOPT के अधिकारियों ने बताया कि रेलवे और रक्षा मंत्रालय में सबसे ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर्स हैं, इसलिए उनकी मांगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

6. विभिन्न मंत्रालयों में पहले से लंबित मुद्दों का समाधान

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि 8वें वेतन आयोग के तहत कुछ ऐसे मुद्दों को नहीं भेजा जाना चाहिए, जो पहले से विभिन्न मंत्रालयों में लंबित हैं। इन्हें 8वें वेतन आयोग से पहले ही हल करने की सिफारिश की गई।


सरकारी प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

बैठक के दौरान कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव ने कहा कि यह पहला दौर था और आगे भी ऐसे विचार-विमर्श होते रहेंगे। उन्होंने कर्मचारी पक्ष की सभी मांगों को 8वें वेतन आयोग के सामने रखने का आश्वासन दिया।

सरकार अब इन मांगों पर विचार कर रही है और संभव है कि आने वाले वेतन आयोग की रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा हो।


क्या सरकार कर्मचारियों की मांगें मानेगी?

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए हर 5 साल में पेंशन बढ़ोतरी, कंप्यूटेशन की अवधि 12 साल करने और मेडिकल भत्ते में बढ़ोतरी जैसी मांगें काफी महत्वपूर्ण हैं। अगर सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है, तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिलेगी।

अब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार 8वें वेतन आयोग में इन मांगों को पूरा करेगी या फिर कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ेगा? यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा।

आपका इस पर क्या विचार है? क्या सरकार को इन मांगों को तुरंत लागू करना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट करें।


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