OPS News: केंद्र सरकार ने NPS में सुधार कर एक नई योजना यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की घोषणा की है, जिसे अप्रैल 2025 से लागू करने का प्रस्ताव है। लेकिन इस योजना से सरकारी कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि UPS केवल NPS का एक विस्तारित संस्करण है और इसमें सामाजिक सुरक्षा और गैर-अंशदायी पेंशन के लाभ नहीं मिलते।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
1. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली:
OPS एक गैर-अंशदायी पेंशन योजना थी, जिसमें कर्मचारियों को सेवा समाप्ति के बाद उनकी अंतिम तनख्वाह का 50% पेंशन के रूप में मिलता था।
2. 20 वर्ष की सेवा पर पेंशन पात्रता:
वर्तमान में पेंशन पात्रता के लिए 25 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। कर्मचारी इसे घटाकर 20 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं।
3. जीपीएफ की मान्यता:
कर्मचारी चाहते हैं कि अंशदायी निधि को जीपीएफ (General Provident Fund) की तरह मान्यता दी जाए और सेवानिवृत्ति पर ब्याज सहित राशि की वापसी सुनिश्चित की जाए।
4. विभिन्न लाभ:
UPS/NPS में मिलने वाले लाभ पुरानी पेंशन योजना के बराबर नहीं हैं। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में संपूर्ण राशि लौटाई जाए। इसमे सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।
‘पेंशन जयघोष महारैली’ का आयोजन
17 नवंबर 2024 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलॉईज फेडरेशन (AINPSEF) के बैनर तले महारैली आयोजित होगी। इस रैली में लाखों कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कर्मचारी देशभर से आएंगे, जिनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, और असम जैसे राज्यों के कर्मचारी संगठन शामिल हैं।
मुख्य उद्देश्य:
– OPS बहाली के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना।
– UPS/NPS के खिलाफ कर्मचारियों की एकजुटता दिखाना।
पेंशन आंदोलन के प्रमुख चेहरे:
मंजीत सिंह पटेल: नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष।
सी. श्रीकुमार: अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF) के महासचिव।
कर्मचारी संगठनों की आपत्ति
1. UPS का विरोध: UPS में कर्मचारियों को 60 वर्ष की उम्र के बाद ही पेंशन मिलती है। यह योजना अंशदायी है, जिसमें कर्मचारी का योगदान शामिल है। संचित निधि की वापसी संभव नहीं है।
2. NPS के खिलाफ लड़ाई: NPS को 2004 में लागू किया गया था। यह अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें पेंशन फंड बाजार से जुड़ा होता है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है।
कर्मचारियों की रणनीति:
कर्मचारी UPS और NPS दोनों को खारिज करते हुए OPS की बहाली की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने के लिए एकजुटता बनायेगें। ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन OPS बहाली के लिए सुनिश्चित करेंगे।
OPS बहाली का महत्व
1. सामाजिक सुरक्षा:
OPS में कर्मचारी को पेंशन की गारंटी थी, जो सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार था।
2. सुरक्षित भविष्य:
गैर-अंशदायी पेंशन योजना होने के कारण कर्मचारियों को वित्तीय स्थिरता मिलती थी।
3. सरकार की जवाबदेही:
OPS में पेंशन का खर्च सरकार वहन करती थी, जिससे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रहता था।
निष्कर्ष
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली सिर्फ कर्मचारियों की मांग नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का सवाल है। 17 नवंबर की महारैली सरकार के लिए एक बड़ा संदेश है कि कर्मचारियों की आवाज को अनसुना करना आसान नहीं होगा। कर्मचारियों का कहना है कि नाम चाहे कुछ भी हो, लेकिन उन्हें OPS के सभी प्रावधानों का लाभ मिलना चाहिए।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार कर्मचारियों की इन मांगों को मानकर पुरानी पेंशन योजना की बहाली की दिशा में कदम उठाती है।