8th Pay Commision बैठको का दौर शुरू, कमिटी के गठन पर कैबिनेट का बडा फैसला।

आठवां  वेतन आयोग ( 8th pay commision) आयेगा या नही इसको लेकर कर्मचारियो और पेंशनधारकों में चिंता है। कई बार कर्मचारी और पेंशनभोगी मांग कर चुके है कि आठवें वेतन को लेकर कमिटी का गठन किया जाय। आठवे वेतन को लेकर कर्मचारी संगठन पीम मोदी से मिल चुके है  अभी  राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देनेवाले है। इस बीच राज्यसभा से बडी खबर आई है । तो चलीये देखते है कितने आयोग अब तक आ चुके है ।

वेतन आयोग की संरचना

प्रत्येक 10 साल पर वेतन आयोग आता है
चौथा वेतन आयोग  (4th pay commision ) 1986 से 1995
पाँचवा वेतन आयोग  (5th pay commision) 1996 से 2005
छठवा वेतन आयोग (6th pay commision) 2006 से 2015
सातवा वेतन आयोग (7th pay commision) 2016 से 2025
आठवॉ वेतन आयोग (8th pay commision)  2026 से 20236

आठवां  वेतन आयोग ( 8th pay commision) आयेगा या नही इसको लेकर कर्मचारियो और पेंशनधारकों में चिंता है। कई बार कर्मचारी और पेंशनभोगी मांग कर चुके है कि आठवें वेतन को लेकर कमिटी का गठन किया जाय पर केंद्र सरकार अभी तक कमिटी का गठन नही कर पाई ऐसे में सवाल उठता है कि केंद्र सरकार कमिटी का गठन नही कर रही है तो क्या आठवा वेतन आनेवाला है या नही उसी को लेकर माननिय राठवा जी ने सरकार को घेरा।

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) का गठन

केंद्र सरकार के कर्मचारियों/पेंशनभोगियों के वेतन/भत्तों/पेंशन की समीक्षा को लेकर राज्यसभा मे नारण भाई जे राठवा ने वित्तमंत्री से प्रश्न पूछा की केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) का गठन कर रही है या नहीं करने पर विचार कर रही है
यदि करनेवाली है तो इसके संबंध में ब्यौरा क्या है और यदि नही करनेवाली है तो इसके क्या कारण है इसके साथ ही उन्होंने पूछा की क्या यह सच है कि सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दस साल की लंबी अवधि के बाद नया वेतन आयोग बनाने के बजाय इनके वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा प्रत्येक वर्ष करनी चाहिए; और यदि हां, तो सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की इस सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं करने के  क्या कारण हैं?

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने दिया उत्तर

सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के अध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट अग्रेषित करते हुए पैरा 1.22 में यह सिफारिश की थी कि मेट्रिक्स को दस वर्ष की लंबी अवधि की प्रतीक्षा किए बिना आवधिक रूप से पुनरीक्षित किया जाए। इसे एक्रॉयड फार्मूला आधार पर पुनरीक्षित और संशोधित किया जा सकता है। जिसमें ऐसी उपयोगी वस्तुओं के मूल्य परिवर्तनों को विचार के लिए शामिल किया जाता है जो सामान्य व्यक्ति की जरूरतों में शामिल होती हैं, जिनकी शिमला स्थित श्रम ब्यूरो आवधिक रूप से समीक्षा करता है।
सुझाव है कि नए वेतन आयोग की प्रतीक्षा किए बिना उस मेट्रिक्स को आवधिक रूप से संशोधित करने के लिए इसे ही आधार बनाया जाना चाहिए। इसके साथ उन्होंने कहा सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के आधार पर वेतन और भत्तों के संशोधन के लिए अनुमोदन प्रदान करते समय केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस मुद्दे पर विचार नहीं किया गया है।

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